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Apr 14, 2009

तरकश (जावेद अख्तर)

सच ये है हमें बेकार गम होता है
जो चाहा था दुनिया में कम होता है

ढलता सूरज फैला जंगल रास्ता गूम
हमसे पूछो कैसा आलम होता है

गैरों को कब फुर्सत है दुःख देने की
जब होता है कोई हमदम होता है

जख्म तो हमने इन आंखों से देखे है
लोगोंसे सुनते है मरहम होता है

जहाँ की शाख पर अशार आ जाते है
जब तेरी यादों का मौसम होता है

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